शहीदों के नाम है 14 फ़रवरी, आँखे आज भी नम हो जाती हैं- जय प्रकाश सिंह

शहीदों को नमन करते रेडियंट पब्लिक स्कूल के प्रधानाध्यापक, "जय प्रकाश सिंह"

 एक तरफ जहाँ भारतीय पश्चमी सभ्यता के तहत फ़रवरी के महीने के 14 तारीख को प्यार, मोहब्बत के रूप में मनाते आ रहे थे, वहीँ बिगत 3 वर्ष पहले आज ही के दिन देश में एक बड़े आतंकी हमले में शाहिद हुए जवानों के एक रेजिमेंट के बाद भारत में 14 फ़रवरी को, शहीद दिवस के रूप में भी जानने लगे लोग....

एक तरफ जहाँ पूरा विश्व प्यार के महीने को गुलाब के फूलों से सजा रहा था, वहीं पुरे भारत में शहीद हुए जवानों के लिए नेत्रों में जल और हाथों में श्रद्धा सुमन लिए सारे भारतीय पुलवामा का शोक मना रहे थे। पुलवामा की घटना ऐसी घटना थी जिसका दर्द कभी भी भी मिटाया नहीं जा सकता।

उसी दर्द की याद में आज रेडिएंट पब्लिक स्कूल में शिक्षकों सहित सभी बच्चों ने हमले में शाहिद उन सभी योद्धाओं के याद कर के उनके चित्रों पर श्रद्धा सुमन को अर्पण किये। देश और देश के  सुरक्षा में लगे सैनिकों के लिये बच्चों में जो गंभीरता दिखी वो अतुलनीय थी। दो मिनट के मौन ने इतना कुछ कहा कि बताया नहीं जा सकता।

विद्यालय के प्रधानाध्यापक जय प्रकाश सिंह ने कहा की भारत हमेशा से प्यार, मोहब्बत अमन, चैन का देश रहा हैं और उस देश में पुलवामा की घटना ने मेरी आत्मा को रुला दिया। मैं जब भी उस घटना को याद करता हैं तो सारी तस्वीरें सामने आ जाती है और आँखे खुद-ब-खुद नम हो जाती हैं। 

उत्कर्ष, गौरव, प्रभात, सरोज, खुशबु कुमारी, अदिति सिंह, शीतल कुमारी, मुस्कान कुमारी आदि यह उन छात्र-छात्राओं के नाम है जिन्होंने भारत माता की जयघोष से पूरे विद्यालय परिसर में एक अलग ही ऊर्जा का संचार भर दिया।

इस मार्मिक क्षण के साक्षी रहे शिक्षकों में प्रभाकर मिश्र, अनिल उपाध्याय, पवन पांडेय, रघुनाथ शर्मा, भुवनेश्वर यादव,  चंदन सिंह, पुष्पा शर्मा, रेखा तिवारी, अंजलि सिंह, अंकिता सिंह, अपराजिता सिंह, अनिमा कुमारी, प्रतीक्षा कुमारी, सौम्या सिंह, विभा सिंह, आदि ने भी दो मिनट का मौन रख कर शहीदों को श्रद्धांजलि दी।

देश से बड़ा कुछ भी नहीं और देश पर जान लुटा देने वालों वीरों के आगे हम सभी नतमस्तक है।

जय हिंद

एक टिप्पणी भेजें

और नया पुराने