बच्चों ने परोसा स्वाद और सीखी व्यापार की सिख...
सदर प्रखंड के कमरपुर पंचायत अंतर्गत कृतपुरा गांव स्थित एस.एस. कॉन्वेंट स्कूल परिसर आज के दिन केवल एक विद्यालय नहीं रहा, बल्कि वह आंगन बन गया—जहाँ बचपन मुस्कुरा रहा था, संस्कार बोल रहे थे और भावनाएं आँखों से झलक रही थीं। अवसर था विद्यालय में आयोजित भव्य बाल मेले का, जिसने शिक्षा को संवेदना, संस्कृति और जीवन मूल्यों से जोड़ दिया।
इसबाल मेले का उद्घाटन किसी राजनेता या अधिकारी से नहीं, बल्कि माता-पिता के आशीर्वाद भरे हाथों से कराया गया—जो अपने आप में एक गहरा संदेश था। विद्यालय की निर्देशिका वंदना राय की सासु मां श्रीमती बनारसी देवी और ससुर श्री विजय कुमार राय ने जब संयुक्त रूप से फीता काटा, तो वह सिर्फ एक उद्घाटन नहीं था, बल्कि पीढ़ियों के बीच संस्कारों का सेतु था।
जैसे ही उद्घाटन हुआ, पृष्ठभूमि में गूंज उठा भावनाओं से भरा गीत—
“हे मात-पिता तुम्हें वंदन, जो मुझे इस दुनिया में लाया…” उस पल कई आंखें नम हो गईं। वातावरण में एक सुकून था, एक अपनापन था जिसने यह याद दिला दिया कि माता-पिता सिर्फ जन्म देने वाले नहीं, बल्कि जीवन की पहली पाठशाला होते हैं। विद्यालय प्रबंधन द्वारा माता-पिता को सर्वोपरि मानते हुए उन्हीं के करकमलों से कार्यक्रम का शुभारंभ कराना पूरे आयोजन की आत्मा बन गया।
उद्घाटन के बाद जब अतिथि बच्चों के स्टॉलों तक पहुँचे, तो वहाँ केवल खाने-पीने की चीज़ें नहीं थीं—वहाँ बच्चों के सपने सजे थे। नन्हे-नन्हे हाथों से बने पानीपुरी, चाउमीन, बर्गर, मंचूरियन, समोसा, जलेबी, गाजर का हलवा, बिस्कुट, चिप्स और चॉकलेट बच्चों की मेहनत, आत्मविश्वास और सीख का प्रतीक थे। चाउमीन के स्टॉल पर लगी भीड़ ने बच्चों के उत्साह को दुगना कर दिया।
सबसे खूबसूरत दृश्य तब देखने को मिला, जब बच्चे खुद ग्राहकों से बात करते, पैसे संभालते, हिसाब लगाते और मुस्कुराते हुए सामान सौंपते नजर आए। उन मासूम चेहरों पर झलक रहा आत्मविश्वास यह कह रहा था कि ये बच्चे सिर्फ किताबें नहीं, जीवन जीना भी सीख रहे हैं।
विद्यालय की निर्देशिका वंदना राय ने कहा कि बाल मेले का उद्देश्य बच्चों को पढ़ाई के साथ-साथ जीवन की व्यावहारिक समझ देना है, ताकि वे आगे चलकर आत्मनिर्भर, संवेदनशील और जिम्मेदार नागरिक बन सकें। वहीं प्रधानाध्यापक त्रिलोचन कुमार ने कहा कि ऐसे आयोजन बच्चों के भीतर छिपी रचनात्मकता को पंख देते हैं और उन्हें खुद पर विश्वास करना सिखाते हैं।
मेले का हर कोना बच्चों की खुशी से चमक रहा था। मिकी माउस स्लाइडिंग, जंपिंग यार्ड, प्लेन स्लाइडर और झूले पर खिलखिलाती हंसी यह बता रही थी कि बचपन को जब खुला आसमान मिलता है, तो वह और सुंदर हो जाता है। रंग-बिरंगे गुब्बारे, बांसुरी और खिलौनों की दुकानों पर बच्चों की चमकती आंखें मेले की सबसे बड़ी सफलता थीं।
कार्यक्रम की पूरी जिम्मेदारी संभाल रहीं उप निर्देशिका जिज्ञासा कुमारी ने बताया कि उम्मीद से कहीं अधिक संख्या में अभिभावकों की उपस्थिति ने आयोजन को और भी खास बना दिया। उन्होंने कहा कि यह मेला विद्यालय, अभिभावक और बच्चों—तीनों के साझा विश्वास और प्रेम का परिणाम है।
बाल मेले में खुशी कुमारी, मानवी राय, साक्षी कुमारी, मोनालिका, अनुराधा, लक्ष्मी, प्रतिज्ञा, सपना, अदिति सिंह, कुमार प्रगति, अनमोल कुमार, पियूष पाठक सहित कई बच्चों ने जिम्मेदारी निभाई, जबकि शिक्षकों में लालसा मिश्रा, नूतन राय, नीलम कुमारी, प्रीति कुमारी, प्रिया कुमारी, मधु कुमारी, मिस तनु, प्रमोद कुमार, नितीश कुमार, बैजनाथ पांडेय, अनुज कुमार समेत सभी ने बच्चों का सहयोग कर कार्यक्रम को सफल बनाया।
कुल मिलाकर, एस.एस. कॉन्वेंट स्कूल का यह बाल मेला सिर्फ एक आयोजन नहीं था, बल्कि यह संस्कारों का उत्सव, माता-पिता के प्रति श्रद्धा का मंच, और बचपन के सपनों को उड़ान देने वाला एक यादगार अनुभव बन गया।






