भारतीय संस्कृति, परंपराओं और पर्यावरण संरक्षण के प्रति विद्यार्थियों को जागरूक करने के उद्देश्य से रेडियंट पब्लिक स्कूल, बक्सर द्वारा 25 दिसंबर 2025 को तुलसी पूजन दिवस का भव्य आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम विद्यालय की बक्सर ब्रांच के साथ-साथ दानी कुटिया, कृतपुरा स्थित शाखा में भी श्रद्धा और उत्साह के साथ संपन्न हुआ।
कार्यक्रम की शुरुआत विधिवत वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच तुलसी पूजन से हुई। छात्र-छात्राओं एवं शिक्षकों ने सामूहिक रूप से तुलसी के पौधे का पूजन कर उसके धार्मिक, औषधीय और पर्यावरणीय महत्व को समझा। इस अवसर पर बच्चों को बताया गया कि तुलसी न केवल हमारी आस्था का प्रतीक है, बल्कि यह मानव स्वास्थ्य और पर्यावरण संतुलन के लिए भी अत्यंत लाभकारी है।
विद्यालय के निर्देशक पारस नाथ सिंह ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा,
"आज की आधुनिक जीवनशैली में बच्चों को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ना अत्यंत आवश्यक है। तुलसी पूजन दिवस जैसे आयोजन विद्यार्थियों में संस्कार, प्रकृति प्रेम और जिम्मेदारी की भावना विकसित करते हैं। रेडियंट पब्लिक स्कूल का प्रयास है कि शिक्षा के साथ-साथ संस्कृति का भी संरक्षण हो।"
वहीं विद्यालय की उप-प्रधानाध्यापिका श्यामली सिंह ने कहा,
"तुलसी पूजन के माध्यम से बच्चों को यह सिखाया गया कि हमारी परंपराएं वैज्ञानिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। ऐसे आयोजन छात्रों के सर्वांगीण विकास में सहायक होते हैं।"
विद्यालय के प्राचार्य जय प्रकाश सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि
"तुलसी पूजन दिवस नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति से जोड़ने का एक सार्थक माध्यम है। हमारा उद्देश्य विद्यार्थियों में पर्यावरण संरक्षण के प्रति चेतना विकसित करना है।"
कार्यक्रम को सफल बनाने में शिक्षिकाओं आर्या कुमारी, अंकिता कुमारी, रीता कुमारी, विभा सिंह, रेखा तिवारी, पुष्पा शर्मा आदि शिक्षकों की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
इस अवसर पर तुलसी विषय पर आधारित निबंध लेखन, चित्रकला एवं कविता पाठ प्रतियोगिता का भी आयोजन किया गया, जिसमें विद्यार्थियों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले छात्रों को पुरस्कृत कर प्रोत्साहित किया गया।
पूरेआयोजन के दौरान विद्यालय परिसर में सांस्कृतिक चेतना और सकारात्मक ऊर्जा का वातावरण बना रहा। यह कार्यक्रम केवल एक धार्मिक आयोजन न होकर विद्यार्थियों को यह संदेश देने का सशक्त माध्यम बना कि भारतीय परंपराएं और प्रकृति दोनों ही हमारे जीवन का अभिन्न अंग हैं।

